Sunday, June 16, 2019

आषाढ़

झीनी सी बूंदों में
भीनी सी खुशबू है
खुशियों की बाढ़ है
आया आषाढ़ है


घुंघरू सी छम छम है
तेज़ है, मद्धम है
चढ़ाव है, उतार है
आया आषाढ़ है


गुस्सा है, प्यार है
ढेर ढेर दुलार है
ज़िद है और लाड़ है
आया आषाढ़ है


इसकी मनमानी में
थोड़ी शैतानी है
थोडा जुगाड़ है
आया आषाढ़ है


१५ जून २०१५

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