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Wednesday, August 12, 2015

गुमशुदा

ग़मों से, ख़ुशी से
जुदा हो जाएँ
चलो आज हम
गुमशुदा हो जाएँ

चले जाएँ राहों को अपना बनाते
सपने जला के धुएँ में उड़ाते
किसी के लिए इंसान रहें तो
किसी के लिए हम
खुदा हो जाएँ
चलो आज हम
गुमशुदा हो जाएँ

किसी क़ैद से छूट कर भागते हैं
ख्वाबों में ही सोते और जागते हैं
इसी रात में सिलसिले ऐसे हों कि
सफर नींदों का
जाँविदा हो जाएँ
चलो आज हम
गुमशुदा हो जाएँ।

Manasvi
11th August 2015

एक काम ज़रूरी

एक काम ज़रूरी बहुत समय से, कल पर टाला हुआ है…
कांच का इक सपना है,आँखों में पाला हुआ है.

डर जाता है साँसों से, धड़कन से घबराता है,
पलकों की परछाई से चेहरा काला हुआ है…

ज़ख्मों का कोई ज़िक्र नही, चोटों की कोई बात नहीं
खुशियों का इक चोगा है, सीने पे डाला हुआ है.

मेरे सच की मुझे सज़ा क्या देंगे दुनिया वाले,
मेरे चुप की सज़ा है कि होठों पे छाला हुआ है…

Tuesday, July 21, 2015

ताना बाना

मेरे ही मन का ताना बाना
मुझको समेटे बैठा है
वरना मैं कब का टूट कर
फर्श पर बिखरा होता...

सिमटा हूँ फैली दिशाओं में
बंधा हूँ लेकिन हवाओं में
मैं 'बहुत' हूँ तो ये हाल है
कैसा होता जो 'ज़रा' होता...

मैं बहता रहता पारे सा
और परस भी होता अनछुआ
यादों सा क़ैद ना हो पाता
ना वादों सा बिसरा होता...

Sunday, June 7, 2015

उमड़े तो हो बड़े शान से

उमड़े तो हो बड़े शान से,
बरसो तो जानें...
तपती ज़मीनों पे
बूँदें लुटाओ
भिगाओ तो माने.

तुम्हे अच्छा लगता है
तरसाना सबको
कि लोग तुम्हे देखें
बड़ी आस लेके
जताते हो अहसान,
बरसते हो जब भी
कभी यूँ ही प्यार
जताओ तो जानें.

देखे हैं बनते
कई रूप तुम्हारे
कि पहरों तुम्हे
ताके बैठे हैं हम भी
तुम्हे कितनी कसमों
से बाँधा है हमने
कोई वादा तुम भी
निभाओ तो जानें